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साड़ी सप्लाई में गड़बड़ी पर एक्शन मोड में सरकार, खादी बोर्ड की जिम्मेदारी तय होना बाकी”

₹500 प्रति साड़ी की खरीदी, सप्लाई की जिम्मेदारी खादी बोर्ड को

रायपुर। वित्तीय वर्ष 2024-25 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए यूनिफॉर्म के रूप में साड़ियों की खरीदी की गई। प्रति साड़ी ₹500 की दर से हुई इस खरीदी की आपूर्ति जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को सौंपी गई थी। यह पूरी प्रक्रिया भंडारण क्रय नियम 2002 के तहत संपन्न हुई, जिसमें अधिकृत एजेंसी के माध्यम से सप्लाई का स्पष्ट प्रावधान है। बोर्ड ने वेंडरों के जरिए साड़ियों का निर्माण कर जिलों में वितरण कराया और प्रत्येक साड़ी पर बोर्ड की मुहर भी अंकित रही।

शुरुआती वितरण के बाद सामने आईं गुणवत्ता संबंधी शिकायतें

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वितरण के कुछ समय बाद ही कबीरधाम, दुर्ग, रायगढ़ और धमतरी जिलों से साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आने लगीं। साड़ियों की लंबाई निर्धारित मानकों से कम होने, कपड़े की गुणवत्ता कमजोर होने और धुलाई के बाद रंग उतरने जैसी समस्याएं लगातार रिपोर्ट की गईं। इससे पूरे वितरण तंत्र पर सवाल खड़े हो गए।

जनवरी 2026 में पहली जांच, 15 दिन में रिपोर्ट के निर्देश

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मामले की गंभीरता को देखते हुए जनवरी 2026 में विभाग ने पहली जांच समिति गठित की। संयुक्त संचालक (वित्त) को समिति का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि उप संचालक स्तर के अधिकारियों को सदस्य और आईसीडीएस शाखा के सहायक संचालक को संयोजक नियुक्त किया गया। समिति को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

सप्लायर के ₹2.43 करोड़ भुगतान पर रोक, विभाग का सख्त रुख

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जांच के साथ ही विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सप्लायर के 25 प्रतिशत भुगतान, लगभग ₹2.43 करोड़, पर रोक लगा दी। यह संकेत था कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और वित्तीय स्तर पर दबाव बनाकर जवाबदेही तय करने की कोशिश की जा रही है।

मार्च 2026: खादी बोर्ड को स्पष्ट निर्देश, मानक से कम साड़ियों को बदलने की चेतावनी

10 मार्च 2026 को जारी पत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को निर्देशित किया गया कि जांच पूरी होने तक शेष भुगतान रोका जाए। साथ ही स्पष्ट किया गया कि यदि साड़ियाँ मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती हैं, तो उन्हें बदलकर नई साड़ियाँ उपलब्ध कराई जाएं। इससे विभागीय स्तर पर सख्ती और स्पष्ट हो गई।

अप्रैल में जांच का दायरा बढ़ा, नई समिति का गठन

लगातार शिकायतों के बाद 6 अप्रैल 2026 को जांच का दायरा बढ़ाते हुए नई समिति गठित की गई। इस समिति की अध्यक्षता संयुक्त संचालक (आईसीडीएस) को सौंपी गई, जबकि वित्त, भंडार, लेखा और आईसीडीएस शाखा के अधिकारियों को शामिल किया गया। 7 अप्रैल को जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें गुणवत्ता और लंबाई संबंधी बिंदुओं पर जानकारी देने के निर्देश दिए गए।

13 अप्रैल का स्पष्ट आदेश: खराब साड़ियों को बदलना अनिवार्य

13 अप्रैल 2026 को जारी निर्देशों में साफ कहा गया कि जिन साड़ियों में मानक से विचलन पाया गया है, उन्हें बदलकर मानक के अनुरूप नई साड़ियाँ उपलब्ध कराई जाएं। यह आदेश सीधे तौर पर सप्लाई की गुणवत्ता पर कार्रवाई का संकेत देता है।

मंत्री के संज्ञान के बाद तेज हुई जांच, अधिकारियों को सख्त निर्देश

मामला मंत्री के संज्ञान में आने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गति तेज कर दी गई है। अधिकारियों को जांच प्रक्रिया में तेजी लाने और दोष तय करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को भी आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

फाइलों में तेज कार्रवाई, जमीन पर निगरानी पर उठे सवाल

पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन यह दर्शाती है कि जनवरी से ही गड़बड़ियों की जानकारी सामने आ चुकी थी और उसके बाद लगातार आदेश, जांच और निर्देश जारी होते रहे। इसके बावजूद यह सवाल उठ रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर ही वितरण को क्यों नहीं रोका गया। जिला स्तर पर मॉनिटरिंग और नियंत्रण अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा सका।

जिम्मेदारी की कड़ी कमजोर, अब जवाबदेही तय होने का इंतजार

इस पूरे मामले में खरीदी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई और सप्लाई अधिकृत एजेंसी के माध्यम से की गई। इसके बावजूद मॉनिटरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की कड़ी कमजोर नजर आई। अब जब मंत्री स्तर से सख्त निर्देश जारी हो चुके हैं, यह देखना अहम होगा कि खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और संबंधित सप्लायर के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।

नजर अब अंतिम कार्रवाई पर

मामले में सभी प्रशासनिक और विभागीय प्रक्रियाएं सक्रिय हो चुकी हैं। फाइलों में हर तारीख और हर आदेश दर्ज है, लेकिन अब असली परीक्षा इस बात की है कि कार्रवाई जमीन पर कितनी प्रभावी होती है और क्या इस मामले में दोषियों तक जवाबदेही तय हो पाती है।

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